बंगाल ने खिलाड़ियों के लिए आंख की जांच अनिवार्य की, ताकि आई-साइट की समस्या के बारे में पता हो
बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन (कैब) ने खिलाड़ियों के लिए आंख की जांच अनिवार्य कर दी है। कोरोना के कारण लंबे समय से खिलाड़ी खेल से दूर हैं। ऐसे में उनकी आई-साइट में कोई दिक्कत तो नहीं है। इस कारण ऐसा निर्णय लिया गया है। सीनियर और अंडर-23 खिलाड़ियों के लिए जांच अनिवार्य की गई है।
बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले तीन साल से हम ऐसा कर रहे हैं। हर क्वार्टर में खिलाड़ियों के आंख की जांच कराई जाती है। उन्होंने कैब के कदम की सराहना भी की।
क्रिकेट हैंड-आई कॉर्डिनेशन का खेल
कैब के अध्यक्ष अभिषेक डालमिया ने कहा, ‘आईसाइट और रिफ्लेक्स क्रिकेट के लिए दो महत्वपूर्ण चीज होते हैं। हेड कोच अरुण लाल ने इसे अनिवार्य करने के लिए कहा। इसके बाद हमने यह किया।’ पूर्व भारतीय क्रिकेटर दीपदास गुप्ता ने इस फैसले को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट हैंड-आई कॉर्डिनेशन का खेल है।
मैदान पर लौटने के लिए जांच जरूरी
बंगाल के कप्तान रह चुके दीपदास ने कहा, ‘जब आप मैदान पर लौटते हैं तो आपको आंख को जांचने की जरूरत होती है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ऐसे में अगर कुछ कमी आती है, तो आपके जानकारी नहीं होगी।’ उन्होंने कहा कि एमर्जिंग विकेटकीपिंग खिलाड़ियों के लिए स्पिन गेंदबाजों के साथ 7 से 10 दिन का कैंप लगाना चाहिए, इससे उन्हें तालमेल बैठाने में आसानी होगी।
अन्य बदलाव के लिए बीसीसीआई की गाइडलाइंस का इंतजार
टीम के ऑपरेशन्स मैनेजर जयदीप मुखर्जी ने कहा कि इस तरह के नियम से हमें खेल में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘मैच के दौरान हमें यह देखने को मिलेगा कि खिलाड़ी कैच छोड़ रहा है। क्योंकि वह गेंद को ठीक से नहीं जज कर पा रहा है। इस कारण हमने एेसा कदम उठाया है।’ इसके अलावा फिटनेस टेस्ट, विकेटकीपिंग क्लीनिक, स्पिन कैंप और टीम बॉन्डिंग शुरू करने के लिए बीसीसीआई की गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है।
डालमिया ने कहा कि हम बोर्ड की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं। हमने अपनी गाइडलाइन बना ली है। खिलाड़ियों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। इसमें हम कोई समझौता नहीं कर सकते। बंगाल टीम के सिलेक्टर पहले 30 सदस्यीय टीम घोषित करेंगे, जिनके साथ ट्रेनिंग की शुरुआत की जाएगी।
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